हरिसुमन बिष्ट

 स्वयं प्रकाश: अद्भुद किस्सागो 

हिंदी कथा सहित का इतिहास न तो अधिक प्राचीन है और न ही विशाल.यह भारत की स्वतंत्रता से कुछ ही दशक पूर्व आरम्भ होता है और उसके उपरांत एक लम्बी अवधि बीत जाने तक उस कोश को उतना  समृद्ध नहीं कर सके, जितना वैदिक साहित्य और आधुनिक पाश्चात्य साहित्य ,जिसको उद्धृत करते हम थकते नहीं हैं. यहाँ मेरा समृद्ध होने का आशय पूर्णरूप से विचारों से समृद्ध होना है. रचनाकार के  सम्बन्ध - उसके स....

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