मीना बुद्धिराजा

समकालीन यथार्थ और स्वयं प्रकाश

कहानी अपने समय के अंतर्विरोधों और सामाजिक परिवेश के द्वंद्वात्मक संबध से ही उत्पन्न होती है । जीवन के एक कालखंड और चरित्र के माध्यम से कहानी जब किसीविशेष क्षण में निहित अंतर्द्वंद्व को पकडती है तो वह समाज और सभयता के किसी विराट अंत:संघर्ष को ही दिखाने का प्रयास करती है । कहानी में यह समय सतह पर नहीं दिखाई देता और इसके लिये उसे अपने परिवेश की जटिल, बहुस्तरीय संरचना की विस....

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