बालमुकुन्द नंदवाना

डाकिया डाक लाया

अभी कुछ समय पहले हिंदी साहित्य के प्रख्यात कहानीकार स्वयं प्रकाश की आत्मकथात्मक  संस्मरण पुस्तक ‘धूप में नंगे पाँव’ प्रकाशित हुई थी, जिसमे स्वयं प्रकाश ने अपनी नौकरी के दौरान बिताए 36 वर्षों की उनकी यात्रा में हमकदम हुए अपने अजीज मित्रों को आत्मीयता के साथ अपनी अनूठी शैली में याद किया है. पाठकों के बीच यह पुस्तक काफी लोकप्रिय हो रही है.
इधर हाल ही में स्वयं प्रकाश....

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