शाम्भवी

बदलते वक्त का आईना

निबन्ध लेखन , लेखन की एक विचार प्रधान विधा है । विचारो की प्रधानता , गहनता और निरन्तर विचारो का सारगर्भित प्रभाव निबन्धो मे अनिवार्य है । रचनाकार अपनी रचना के माध्यम से न सिर्फ पाठक का मनोरंजन करता है बल्कि पाठक के मन मे विचारो का समावेश और परिवर्तन भी करता है । इस दृष्टि से रचना की भाषा शैली एवं शिल्प विधान का ध्यान रखना आवश्यक है । सारगर्भित रचना चाहे वह कहानी हो ,उपन्यास....

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