मदन कश्यप 

पहला पत्र बिना संबोधन के

स्वयं प्रकाश जी की कहानियां तो पढ़ी थीं और बहुत शुरुआती दौर में ही मुझे लगने लगा था कि वे ज्ञानरंजन की पीढ़ी के बाद के सबसे महत्वपूर्ण दो-तीन कथाकारों में से एक हैं। इस बीच, मैं 1981 में हिंदुस्तान जिंक लि- टुण्डू (धनबाद) चला गया था। पत्रकारिता छोड़कर सार्वजनिक उपक्रम में नौकरी करने का मेरा निर्णय कोई अच्छा नहीं था, उसका अलग किस्सा है। लेकिन कोई एक साल बाद जब मुझे सूचना मिली क....

Subscribe Now

पूछताछ करें