राजेंद्र उपाध्याय

स्वयं प्रकाशमान स्वयं प्रकाश

स्वयं प्रकाश जी से मेरा परिचय तभी से हो गया था जब उनकी कहानी ‘पहल’ के कहानी विशेषांक में छपी थी- 85-86 के दौरान दिल्ली दंगों के बाद- इंदिरा गांधी की हत्या के बाद- ‘क्या तुमने कोई सरदार भिखारी को देखा है?’ कहानी के शीर्षक से ही मन को जिज्ञासा जागी और पढ़ता चला गया। कहानी रेल में घटित होती है। निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन से आधी रात को कोई रेल छूटती है और एक सरदार उसमें चढ़ता है। उ....

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