डाॅ. अखिलेश गुप्ता

स्वयं प्रकाश : कहानी में ज़िंदगी के अनुभवों की चित्रकारी

स्वयं प्रकाश की लिखी कुछ कहानियों को पढ़ते हुए अक्सर यह महसूस किया जा सकता है कि उनकी कल्पित दुनिया के विरुद्ध जो छोटी-छोटी घटनाएँ बेतरतीब ढंग से इस दुनिया में घटित हो रही हैं उन घटनाओं में शामिल मनुष्य की अमानवीयता को थोड़ा-सा ठहरकर उसकी जड़ों को अच्छी तरह से समझने के बाद उसे वह उजागर करते हैं। जिसमें उनकी कल्पना-लोक की दुनिया प्रारंभिक हिन्दी कथा लेखन-परम्परा की तरह किसी &....

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