अजित कुमार ‘यश’

विमर्श के आँगन से बाहर स्त्री के पक्ष में खड़ी स्वयं प्रकाश की कहानियाँ

1990 के बाद हिंदी कहानी के आसमान में भूमंडलीकरण, उदारीकरण, निजीकरण के साथ-साथ मंडल कमंडल और विमर्शों के घने बादल गहराने लगे थे। बदलते भारत की नयी तस्वीर हिंदी कहानी में साफ-साफ दिखने लगी थी। भूमंडलीकरण के खुलते दरवाजे के बीच भारत की पारंपरिक पारिवारिक व्यवस्था में परिवर्तन की बयार बहने लगी थी। इस परिवर्तन की कोख से विमर्शों का साहित्य मुख्य विषय बन कर उभरा। स्त्री, दलित, औ....

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