अनुभूति गुप्ता

क्यों डर जाया करते हैं लोग

दरख्त की शाखा  से

एक पत्ता क्या टूटा

मायूस हो जाया करते हैं लोग 

क्यों डर जाया करते हैं लोग

 

हवा जो उनके मन को सुहाती थी

अब बिल्कुल नहीं भाती है

क्यों घबरा जाते हैं लोग

क्यों डर जाया करते हैं लोग

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