सुधीश पचौरी

धार्मिक विमर्शों की वापसी और सांस्कृतिक  राजनीति 

हर ठोस चीज जो भाप हुई जाती है


पिछले बीस तीस बरसों (1990 से 2020तक) का सामाजिक साहित्यिक सांस्कृतिक परिदृश्य बेहद तेज रफ्तार से सतत बदलता हुआ वे बेहद उलझा हुआ परिदृश्य है-
यह एक उत्तर सोवियत समय है जिसमें ग्लोबलाइजेशन,बहुराष्टी्रय निगमों के निवेश,फी्र मारकेट इकनामी, वैश्चिक स्तर पर आर्थिक उदारीकरण के साथ आती कंप्यूटर, इंटरनेटका्रंति व डिजिटल का्रति ....

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