अपने-अपने दण्डकारण्य: पे्रम जरूरी है, मनुष्य और मनुष्यता के लिए

अपने-अपने दण्डकारण्य  युवा कवि संतोष तिवारी का दूसरा काव्य संग्रह है। उनका पहला संग्रह सन् 2013 ई0 में बोधि प्रकाशन, जयपुर से फिलहाल सो रहा था ईश्वर, शीर्षक से प्रकाशित हुआ था और इसे सुधी समीक्षकों और पाठकों की अच्छी प्रतिक्रिया प्राप्त हुई थी। संतोष तिवारी पेशे से अध्यापक हैं। इण्टरमीडिएट काॅलेज में हिंदी साहित्य पढ़ाते है और उत्तराखंड के नैसर्गिक परिवेश में लंबे समय स....

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