दीर्घ नारायण

सौ करोड़ वाला संविधान

पिछले दो महीने में वह दिल्ली की दौड़ लगा चुका था। कोई चार पांच दफा, दिल्ली दरबार में मत्था टेकने पर टिकट चीज ही ऐसी है कि हाथ में आने की कोई सूरत नहीं दिख रही थी। हालांकि वह एक बार सांसद रह चुका था, पर पूर्व सांसद की सूरत तो क्षेत्र में भी साफ-साफ पहचान में नहीं आती है, दिल्ली में क्या बिसात।

बीते चार-पांच साल में इस क्षेत्र में ऐसी कई निंदनीय हरकतें हुई हैं, धन ....

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