सुदर्शन वशिष्ठ

मंच पर सन्नाटा        

पूर्व रंग

वह सुबह साढ़े छः बजे ही घर से निकल गया। पत्नी बोलती रही, अभी क्यों चल पड़े, ठीक से उजाला भी नहीं हुआ। आराम से जाना।
     दूध वाली चाय पीने की आदत थी पुरी को। बचपन से ही मलाई डाल कर गाढ़े दूध वाली चाय पीता था। बचपन में सुबह उठते ही मलाई वाली चाय मिलती जिसका स्वाद दातुन करने के बाद भी नहीं जाता। चाय पी कर जंगलपाणी जाने के बाद लेंटेना की झाड़ से दातुन करते....

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