दिविक रमेश

क्या चचा सलीम मुसलमान तो नहीं हो गए? 

इस शहर में दंगों का होना कोई अजूबा नहीं रह गया। न हो तो जरूर हैरानी हो। सदा की तरह इस बार भी हुआ। खूब जोर-शोर से। अखबारों में खबर छपी। कहीं-कही चालाकियों के साथ भी। अपनी ओर से सनसनीखेज पर एकदम घिसे हुए रिकार्ड सी। दो भिन्न धर्मों के लोगों में लड़ाई। अलग-अलग सम्प्रदायों के इतने लोग हताहत और इतने जख्मी हालत में।  शहर के फलाँ - फलाँ अस्पताल में भर्ती हैं। कुछ की स्थिति नाजुक और ....

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