अमित श्रीवास्तव

कोतवाल का हुक्का

आज सुबह तीन पानी के पास उस फ़कीर की लाश मिली थी|  कुछ दिन से शहर में एक फ़कीर को देखा जा रहा था| फ़कीर क्या, लोग तो उसे पागल समझ रहे थे| वो तो उसने जब, यूं ही बेवजह आँखें नहीं झपकाईं, किसी की बात का जवाब अजीब सी भाषा में नहीं दिया और बच्चों के खिलखिलाने पर किसी बच्चे के ऊपर पत्थर नहीं फेंके तब लोग उसकी लम्बी बेतरतीब दाढ़ी, फटे कपड़ों और कंधे से लटके बड़े से झोले के बाद भी उसे पागल न कहकर ....

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