जोशना बैनर्जी आडवानी

सोनागाछी मतलब सोने का पेड़....

वे नर्तकियाँ थीं

नृत्य कला में सम्पन्न

मणि खचित, अमल, धवल

देवी को पूजती स्वयं कला की देवियाँ 

राजसम्मान पाती थीं 

उनके समीप नहीं जा पाता था कोई भी सामान्य जन

यह अक्षुण्ण नहीं रहा

समय की प्रलयाग्नि बुझी इनकी देहों पर

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