विजय राही

देश    


देश एल्यूमीनियम की पुरानी घिसी एक देकची है
जो पुश्तैनी घर के भाई-बँटवारे में आई
 
लोकतंत्र चूल्हा है श्मशान की काली मिट्टी का
जिसमें इसबार बारिश का पानी और भर गया है
जनता को झौंका हुआ है इसमें 
बबूल की गीली लकड़ी की तरह
आग कम है, धुआँँ ज़्यादा उठ रहा है
 
नेता फटी छाछ है 
छाछ का फटना इसलिए भी तय था
क्योंकि खुण्डी भैस के दूध में 
जरसी ....

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