पियूष पंड्या

मुझे आपका नही पता साहिब

पर मातृभूमि शब्द मुझे 
आइडेंटिटी क्राइसिस देता है|

भूमि जहाँ मैं पैदा हुआ,
जबलपुर का कमानिया
उस घर को तो मैं 
बचा नही पाया,
देश का मैं क्या कहूँ|

और आखिर देश है क्या?
राजनीतिकी सन्निपात का प्रतिसाद ?
जिसके अन्दर और बाहर भी देश हैं 
ये बताइयेगा 

जिन्हे सड़कों पर हम नचाते हैं 
वो बंद....

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