नताशा

 देश राग ॥


    
   अपनी स्मृति के प्रथम अध्याय का
यह गीत  सबसे पहले याद आता है-
"बजे सरगम हर तरफ से गूँज बनकर देश- राग"

तब से मैंने देश को  राग की ही तरह सुना
जिसके विभिन्न स्वर 
अपनी लय में आरोह-अवरोह का तान रचते रहे

फिर भूगोल के ग्लोब पर चिपका हुआ वह विशिष्ट भू-भाग 
दिक् और काल की अवधारणा में लिपटा
सीमित जल
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