दिनेश शुक्ल

रोज भटकता रात दिन मुझमें यह गुजरात

फ्लेग  मार्च घोड़े करें, कफ्रर्यू आधी रात

रोज भटकता रात दिन, मुझमें यह गुजरात

मुझेमें चीखें जागती, शिविर जागते रात

उठ-उठ बैठे नींद से, डर-डर कर गुजरात 

पुलिस, सायरन, सीटियां, भीड़ मुनादी, जेल

यह देखे गुजरात ने, इक माचिस के खेल

कभी चीखता गोधरा, कभी भिव....

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