रोचिका अरुण शर्मा

कैक्टस

वह बरामदे में खड़ा जोर-जीर से चीख रहा था ......मोहल्ले के कुछ लोग घर  के बाहर आ कर मज़ा ले रहे थे और जो सामने नहीं आना चाहते थे ....खिड़की व दरवाजों की ओट से छुप कर तमाशबीन बने हुए थे ।
उसके दोनों बेटे उसे घर के अन्दर ले जाने की कोशिश कर रहे थे और वह गाली-गलौज करता हुआ जमीन पर ही लेट गया था ।
उसका नाम है रामसिंह .......एक पैंसठ वर्षीय वृद्ध .......जिसने जिन्दगी में कभी एक जगह टिक कर काम नहीं ....

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