अनिल कुमार गीते

यू आर फायर्ड

“ सुधी$$$$र “
रंजना को जैसे करन्ट सा लगा ,वह एकदम चिहुँक कर उठी , उसके स्वर में उसे मादकता का पुट प्रतीत होते हुए भी जैसे कुछ अधिकार ,पराजय , अप्रत्याशित जैसा कुछ मिला जुला भी प्रतीत हुआ  |
“सुधीर यू आर हर्टिंग मी “
उसने चाहा वह खेल को यूँ ही चालू रखे | उसे लगा कि उसे इस खेल से आनंद जैसा कुछ ही मिल रहा है , किन्तु आनंद से ज्यादा उसे विजय भाव एवं सामने लेटी रंजना का निरी....

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