अमेय कांत

हमें छोड़ा नहीं जायेगा

 

हमें छोड़ा नहीं जाएगा
एक खोल के भीतर 
सड़ती मिलेगी मनुष्यता
और दीमकें हमारे कुल हासिल की 
तरह निकलेंगी बाहर

हमारे ही प्रश्नचिन्ह का अंकुश बनाकर
लटकाया जाता रहेगा हमें 
कुछ तयशुदा मानकों पर

इस क्रूर समय के बीहड़ों में 
क्या हम यूं ही भटकते रह जाएंगे 
किसी बेहतर समय की तलाश में?

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