केशव दिव्य

जाल

एक बार भेडिया
हाथ जोड़े खुद
मेमनों के पास गया
उनके बीच रहा
स्नेह जताया

फिर
वापस चला गया
खुशी से
झूमता हुआ
सोचता हुआ
जादू चल गया

इधर मेमने
लगे बतियाने परस्पर
‘देऽा नाहक डर रहे थे’
‘कितना नेक है वो’
‘कितनी अच्छी -अच्छी
बातें कर रहे थे।’
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झाड़ू
झाड़ू
झाड़ू ऐसी वैसी नहीं
इम्पोर्टेड
दूर देश से आई

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