भारत भारद्वाज

पं- प्रताप नारायण मिश्र

भारतेंदु-युग में ‘हिंदी नई चाल में ढली’। इस छोटे वाक्य का निहितार्थ आशाय व्यापक ही नहीं, बल्कि खड़ी बोली हिंदी के आरंभ के साथ हिंदी में आधुनिक युग के सूत्रपात का संकेत भी है। भारतेंदु हरिश्चंद्र के साथ जिन अन्य कवि-लेखकों ने हिंदी की विविध विधाओं में लेखन का काम किया, उनमें चौधरी बदरीनारायण उपाध्याय ‘प्रेमघन’ (संपादक - आनंद कादम्बिनी), पं- प्रताप नारायण मिश्र (संपा....

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