स्मृति- शेष

  • एक शक्तिशाली, साहसी, विद्वान, वयोवृद्ध वरिष्ठ अधिवक्ता का जाना

    ‘‘हम अपने राज पर नाजां थे, शर्मसार न थे, हर इक से हम सुखन-ए-राजदार करते रहे--’’ फैज अहमद फैज, 21 अगस्त 1953 (जिन्ना अस्पताल,

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