लघुकथा/व्यंग्य

  • ‘विडम्बना’

    सुबह-सुबह लाॅन में बैठे सक्सेना जी आस-पास के खुशनुमा परिवेश का लुत्फ उठा रहे थे। चहकते हुए पाखी,चटकती हुई कलियों से

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  •  जादूगर की मौत 

    ‘कम उम्र की लड़की’ और ’तार-तार की जाने लगी थी’ जैसे शब्दों ने वार्ताकार की सांसों में गर्माहट-सी ला दी। उसने अलग-सी न

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