कहानी

  • देह का गणित

    जैसा कि हम सभी जानते हैं, लेखक कहानियों के प्लॉट समाज से ही उठाता है। तकरीबन 14-15 साल पहले ‘गृहशोभा’ में व्यक्तिगत सम

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  • चंदर की सरकार

    चंदर की पार्टी चुनाव जीत गयी है। अब तो उसकी और उसके कुटुम्बजनों की किस्मत बदल जाएगी। चंदर यानी चंद्र प्रकाश पार्टी

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  • मन्नों दी...

    बचपन याद आते ही मन्नों दी का याद आना बड़ा लाजमी-सा हो जाता है ऐसा क्यों? वो न तो मेरी सगी दीदी थीं न रिश्तेदार फिर भी व

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  • दर्द न जाने कोई

    बरसात के बाद नदी जब अपना पानी समेटती है तो कुछ पानी किनारे के गड्डों में छोड़ती चली जाती है। मुख्य धारा से पीछे छूट

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  • कुनबेवाला

    दीये गिन तो। मेरे माथे पर दही-चावल व सिंदूर कातिलक लगा रही मां मुस्कुराती है। वह अपनी पुरानी एक चमकीली साड़ी पहने ह

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  • सख्ती

    शिकायत वा पस लेने के लिए पचास लाख रुपयों की डिमांड की थी डॉक्टर से महिला ने। महिला ने शिकायत की थी कि डॉक्टर ने उसके

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  • पाप-पुण्य

    पूरे गांव में हलचल थी। प्रधान जी ने छोटी काशी भेजने के लिए ट्रैक्टर-ट्राली का इंतजाम करा दिया, साथ मेें खाने-पीने का

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