कहानी

  • हाथ ठहरा हुआ

    जून का महीना था जिसे सरकारी अमले के स्थानांतरण का महीना भी माना जाता है।

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  • हर्ज़ाना

    घंटी बजी, नौकर ने दरवाज़ा खोला

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  • बोह

    फिर बीरपुर बैराज के 56 फाटक खोल दिए गए।

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  • आख़री धागा 

    अभी तक वह , उस सदमें से उभर नहीं पायी थी ।

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  • हिरण्यगर्भा 

    मोबाईल की घंटी जैसे ही फिर से बजी तो राजीव ने उसे बंद करके कुर्सी पर फेंक दिया और फिर खिड़की से बाहर देखने लगा।

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  • रुकैया

    " लाश उठाओ ...लाश उठाओ ...क्या घण्टा इंसान हो तुम ...चिल्ला -चिल्ला कर बोल रहा हूँ इसका नाम ......"

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