कहानी

  • सौ करोड़ वाला संविधान

    पिछले दो महीने में वह दिल्ली की दौड़ लगा चुका था। कोई चार पांच दफा, दिल्ली दरबार में मत्था टेकने पर टिकट चीज ही ऐसी ह

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  • मंच पर सन्नाटा        

    वह सुबह साढ़े छः बजे ही घर से निकल गया। पत्नी बोलती रही, अभी क्यों चल पड़े, ठीक से उजाला भी नहीं हुआ। आराम से जाना।      दू

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  • क्या चचा सलीम मुसलमान तो नहीं हो गए? 

    इस शहर में दंगों का होना कोई अजूबा नहीं रह गया। न हो तो जरूर हैरानी हो। सदा की तरह इस बार भी हुआ। खूब जोर-शोर से। अखबा

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  • कोतवाल का हुक्का

    आज सुबह तीन पानी के पास उस फ़कीर की लाश मिली थी|  कुछ दिन से शहर में एक फ़कीर को देखा जा रहा था| फ़कीर क्या, लोग तो उसे पागल

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  • लोकतंत्र का कुकुर कांड

    केवल हड़कम्प नहीं, भरपूर दहशत थी गली में। जो भी सामने आता, भुरवा उसी पर हमला बोल देता। अब तक तीन लोगों को काट चुका था।

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  • नींद  

    उस एक शख्श ने फिलहाल पूरे देश में खलबली मचा रखी थी |  हर खासोआम की जुबां पर बस एक ही नाम , एक ही तारीख और उस ख़ास तारीख की

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  • आज इम्फ़ाल फिर बंद है !

    खिड़की के पर्दे को चीरता धूप का एक नारंगी टुकड़ा सुनन्दा के पैरों पर आकर रुक गया। सुनन्दा पैर इधर- उधर कर उस टुकड़े क

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  • ताना बाना

    उनके पैर साइकिल के पैड़ल पर तेजी से चल रहे थे बूढी हथेलियों ने साइकिल का हैंडल कस के पकड़ रखा था! यह जनवरी की एक सर्द सु

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  • यहाँ और वहाँ

    चेतन ने एक नज़र खेत के किनारे सुस्ता रहे अन्य श्रमिकों की तरफ देखा. सभीथके-प्यासे थे. बीस लोगों की टीम में कुछ ही थे जो

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  • अश्वमेध का घोड़ा

    लड़के के कमरे से फिर आवाज़ आ रही है। आवाज़ कुछ आड़ी – तिरछी है। इसे किसी चीज को मारने से ज्यादा या टूटने से कम की आवाज़ कह स

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  • ’असल मुनाफ़ा’

    भोर होते ही सौदागर ने पेड़ से बंधा अपना घोड़ा खोला, उसकी पीठ थपथपायी, दाना-पानी दिया एवं देखते ही देखते पेड़ के पास रखे इ

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  • बस एक लफ्ज़ और...!

    दंगो की अपनी एक भाषा होती है, उसका एक शास्त्र होता है, एक इंजीनियरिंग होती है, जिसकी फ्रंट लाइन में औरतों और बच्चों क

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  • खून का पता न मिला तो ताबूत मिल जाएगा

    दो महीने पहले नफीस की अम्मी के घुटने का ऑपरेशन हुआ है। संयोग से यह अच्छा है कि उनका मेडिक्लेम था। नहीं तो यह संभव कह

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  • सुरंग

    सुगुप्त सब्जी का झोला ले कर घर में आए ही थे कि पत्नी से सूचना दी कि ग्लोबल कालेज में एमसीए के प्रास्पेक्टस मिल रहे ह

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  •  उस रात...?

    उसने कुत्तों के पहुँचने से पहले ही रोटी अपने अधिकार में कर ली।खिसियाये कुत्तों की धीमी गुर्राहट सेे बेपरवाह वह उस

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