कहानी

  • चक्रव्यूह में अभिमन्यु

    अचानक कॉल बेल बज उठी तो प्रभाकर जी किंचित चौंक पड़े। आज रविवार था। सुबह के दस बजे थे। यह उनके लेऽन-पठन का समय होता है।

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  • एक बटे तीन

    जमीन-जायदाद का बँटवारा सदा ही होता रहा है, कोई नयी बात नहीं। नयी बात यह है कि यहाँ एक बटे चार नहीं, एक बटे तीन हुआ। माँ

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  •  रिश्ते की किरचे    

    दादी नही रही यह खबर सुनते ही मै अपने  पिहर जा पहुची. घर पर खासी भीड जमा थी. दादी की लाश के पास कई औरते बैठी थी. मै भी रोत

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  • कृति से कवच उतार दो 

    सूरज मध्य में था। किसके मध्य ये मत पूछियेगा ? फिलहाल तो, उस चमचमाती कलाकृति पर बरस रहा था। ऐसा लग रहा था जैसे उसे अपनी

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