कहानी

  • कहानी है कि खत्म नहीं होती

    मैं जब पहली बार उससे मिला, तब वह मुझे वैसी ही उदास लगी जैसे कि सर्दियों में सूने आकाश मंे ठिठका हुआ मलिन-सा चाँद। ऐसा

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  •   गुनाहगार

    रात के सात बज चुके थे । देव मुखर्जी का पूरा ध्यान मुख्यद्वार के गेट पर था । गेट के बाहर कुछ देखने का प्रयास कर रहे थे

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  • आया ऊँट पहाड़ के नीचे

    मास्टराइन भौउजी की दबंगई देखिये हफ्ते में एकाध दिन की बात कौन कहे, महीने में एकाध घंटे के लिए भी स्कूल आना नहीं चाहत

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  • मिसेज ढींगरा खुश हैं  

    वे तथागत के एकदम सामने वाले फ्लैट में रहती थीं। सामने का मतलब उसकी बालकनी से उनकी खिड़कियां साफ दिखती थीं। एक खिड़

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