कहानी

  • गिलहरी और समुद्र

    मैं उस समय सोया ही था, करीब दस बजे का वक्त होगा, जब दरवाजे पर दस्तक हुई, इस समय कौन होगा! मैं हड़बड़ाहट में उठा और दरवाजा

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  • सांझ का सूरज

    दरवाजा चाची ने हीं खोला। राकेश को देखकर उनके चेहरे पर प्रसन्नता की हल्की सी किरण थिरकी और तुरंत ही लुप्त हो गई। वे फ

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  •   काश, तुम समझ पाते

    गाँव से बड़े भैया का फोन आया कि धनकुनि चाची नहीं रहीं। धनकुनि चाची अम्मा की सहेली थीं। मैया-बहनियाँ के धरातल पर अम्म

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  • लाल ईंट  

    सुबह की पौ फटने वाली थी | क्षितिज पर लालिमा छा गयी थी | पेड़ों पर पंक्षियों का चहचहाना शुरू हो गया था | दलान पर अधिकांश प

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  • एक सूर्यास्त का ब्योरा

    सड़क के अँधेरे आईने में अंतिम ट्राम ग़ायब हो रही थी । ऊपर बिजली के तारों का जाल था जिसमें से कभी-कभी तिड़कने की आवाज

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