कहानी

  •  छड़ी

    जब बाथरूम में झुककर, बाल्टी सरकाते वक्त ,उन्हें यानी सत्तर के हो रहे नाहटा को एकाएक कमर में ‘बैक –अटैक ‘ हुआ तो शरीर

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  • कट्टा

    तीस बरस बाद भी मुन्ना भाई उस लम्हे को याद कर ठंडी सांस लेते हैं। काश कि मां ने क़सम नहीं ली होती। काश, वे बाद में उन लड

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  •   राष्ट्रभक्त

    ऑंखें लग गयीं थीं। पहली नींद की खुमारी में जा चुका था मैं। अचानक धम्म्-ंउचयधम्म् की आवाज से नींद टूट गयी। ऐसा लगा जै

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  • ओ.पी.झा 

    समुद्र किनारे छोटा-सा कॉटेज। फेनिल तरंगों से परावर्तित होकर सूरज की सुनहली किरणें पूरे कॉटेज को नहा रही थीं। जब के

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  • महीन-सी हद

    सुनने वाले भकुए से देख -सुन रहे थे उसे। उसकी आँखों की चमक में शरारत और संजीदगी एक साथ टिमटिमाती हुई। चेहरे के भावों

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  • महीन-सी हद

    रीमा रच रही थी। बातों के गोल-गोल लच्छे।उनमें अटका हुआ एक अप्रत्याशित, अनजाना और कुछ नया रोमांच। तय जैसा कुछ नहीं, फि

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