कहानी

  • ब्रेनवाश

    सूर्यदेवता अभी प्रकट नहीं हुए थे, पर किसी भी समय प्रकट हो सकते थे। वह नहर से खेत में पानी लगाकर मेड़-मेड़ लौट रहा था। कन

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  • हाइड्रोफोबिया  

    मैं इस पहाड़ी क़स्बे का एकमात्र मनोचिकित्सक हूं और मेरा यह क्लिनिक यहां के मनोरोगियों के लिए एकमात्र क्लिनिक है। प

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  • सबकुछ  ठीक-ठाक है 

    खूँटी से पे लटके अपने टी-शर्ट को बदन पर डालने के पहले उसे ख़याल आया, शायद दो दिन हो चुके हैं इसे पहनते हुए.इसे आगे पहनन

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  • मांजी के नाम की पाति

    गांव के उस शानदार हवेली में प्रवेश करती दुल्हन अपूर्वा घानी रंग के सिल्क की भारी साड़ी और आभूषणों को संभाल रही थी औ

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  • हम नै छुवै

    दोपहर केचार बजे रहे होंगे।जब हमारे घर का कॉल बेल किसी ने बजाया।“ओम जय जगदीश हरे” की गूंज पूरे घर में तैरने लगा।मैं

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