कविता

  • सत्ता के लिए मुसीबत

    जो आकार रूपांतरित हुआ वह सत्ता के लिए मुसीबत बन उसे डाल दिया चिंतनीय मुद्रा में।

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  • नदी

    जड़ों से उखड़ पेड़ तिनकों के समान नदी के बहाव संग बहते इस छोर से उस छोर

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  • विस्थापन

    मछलियां बेचैन हैं। जीवित रहने के लिए मछलियों को सीखना होगा उड़ना।

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  • मासूमियत

    मासूमियत मेरी हो या तेरी एक विश्वास है हरी दूब में स्निग्धता और कोमलता के बचे रहने की नोक भर, मासूमियत है तभी कायम ह

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  • कर लो ऐसा

    आती-जाती परछाइयों में से रोक लो या पकड़ लो किसी एक को लगा दो उस पर मनचाहा चेहरा अपनी-सी लगती आंखें ऐसी कोई मुस्कान

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  • जब भी जिंदगी पंतग की

    एक सफेद कागज पर पड़ती है जहां कभी मैंने अपने नाम का हस्ताक्षर किया था

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