कविता

  • तुम्हारे आँसूओं का नमक 

    कोटा से शाम को रेलगाड़ी में बैठो तो सुबह जो आँख खुलेगी वो माया नगरी मुम्बई में खुलेगी

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  • " प्रेम "

    वें स्त्रियां कम न्यौली* ज्यादा लगतीं है , और न्यौली होती है जब उदास, जंगल के घुप्प अँधेरों में वें पहाड़ी स्त्रियों

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  • त्योहार में अपराध

    हे ईश्वर! आज त्योहार है संचय के सुख-दुख से थोड़े पैसे निकाल कर आलू की सब्जी और पुरी खाई है

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  • डरे हुए लोग

    लोग डरे हुए हैं आजकल उन लोगों से भी, जिनके साथ बड़े हुए हैं जिनके साथ कई पीढ़ियों से  खुशियाँ मनायी है, दुख बांटे हैं

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  • देश बदल रहा है

    तुम भी बदलो बन्धु! कब तक अड़े रहोगे  ढहते-टूटते हुए अपने  विचारों के टीले पर क्या कहा।

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