कविता

  • भारत गुमशुदा है

    कि ताजे फलों के सड़ रहे गोदाम में  कि एक-में-एक फ्री की दुकान में भारत कहाँ है 

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  • मेरे मन का शहर

    मेरे मन के अन्दर एक शहर है कुछ इमारतें यादों से भरी, कुछ बस खंडहर हैं,

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  • किताबें और मैं

    और जैसे मैं किताबों से प्यार करता हूं आधा-अधूरा जिससे भी प्यार करता हूं

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  • हे प्रभो ! हे दीनानाथ !

    अलस्सुबह छह बजे अजान की तेज़ आवाज़  गाँव के एक कोने पर बनी  मस्जिद से निकल कर 

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  • कौतूहल

    कौतूहल चुकता जा रहा है जीवन से 

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