कविता

  • मेरे प्यारे देश 

    तुम्हारी तमाम वाचलता और झूठ के विरुद्ध तुम्हारे द्वारा कैद 

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  • तुम कैद में नहीं हो वरवर राव

    क्योंकि पढ़ी जा रही हैं तुम्हारी कविताएं   लगाये जा रहे हैं तुम्हारे नारे

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  • 30 जनवरी

    असली गांधी का वीडियो मैंने 'यू-ट्यूब' पर देखा 'गांधी‌' फिल्म 'डीडी नेशनल‌' पर.. जिसमें गांधी का किरदार 'यू-ट्यूब' के गां

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  • आज हमारा देश ठूंठ है

    समस्त घृणा और विभेद को त्याग  मानवता के प्रति जगा कर राग

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  • देश    

    देश एल्यूमीनियम की पुरानी घिसी एक देकची है जो पुश्तैनी घर के भाई-बँटवारे में आई

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  • सोनागाछी मतलब सोने का पेड़....

    उनके समीप नहीं जा पाता था कोई भी सामान्य जन यह अक्षुण्ण नहीं रहा

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  • गृहयुद्ध

    हम लड़ेंगे साथी लड़ेंगे तबतक जबतक जान हमारी है हम तो लड़ते रहेंगे जबतक ये पहचान हमारी है

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  • सब मांग रहे हैं अपना-अपना हक

    जब से उस आंगन में  दूर-दूर से उड़ आ गईं हैं रंग बिरंगी तितलियां

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  • वे व्याप्त हैं ईश्वर की तरह

    जो हर चमक का गुलाम बनाकर  उसे बटोरने की आजा़दी देते हैं 

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  • बारहमासा       

    ​​​​​​​दिल्ली का दरबार देखो         रानी राजकुमार देखो         गूँगे बहरे राज सभासद          मंत्री अपना यार देखो

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  •  दूसरा विस्थापन  

    रेखांकित करते हैं शाइनिंग इण्डिया को । कि सचमुच अच्छे दिन आ गए हैं स्वदेशी आंदोलन के ।

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  • झंडे के नीचे 

    रँग रहे हैं एक-दुसरे के मन- मस्तिष्क को  कुछ लोग बहीखातों की जुगत में तिकड़म भीड़ा रहे हैं 

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  •  देश राग ॥

    एक घूमता विकास का पहिया अंतरिक्ष में लटका  किसी सफ़र में नहीं था, या सफ़र की कोई मंज़िल नहीं थी

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  • पहले भी कम नहीं थीं मुश्किलें

    ख़बरों में अभी भी पैदल चल रहे हैं लोग साइकिल से जा रहे हैं हज़ार-हज़ार किलोमीटर दूर अपने गाँव दिन भर, रात भर,

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  •    एक और कैंडल मार्च

    देखकर थरथरा रही है देह सुनकर कांप रही है रूह ,

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  • मुझे आपका नही पता साहिब

    जिन्हे सड़कों पर हम नचाते हैं  वो बंदर मेरे पुरखें हैं| सप्तसिन्धु का हडप्पा पाकिस्तानी है| मेरी आँखे सिन्थियन है|

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  • मार डालो

    इन्हें रोको,इन्हें मारो इसलिए नहीं कि ये शांति भंग कर रहे हैं

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  • आओ , आज़ादी - आज़ादी खेलें !  

    आओ हम अज़ब देश ,  गज़ब देश  की पेट्रोयोटिक धुन पर  गाएं नहीं , आज़ादी - आज़ादी खेलें  देश –देश खेलें !

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  • जनता जनार्दन 

      कमाने -खाने के स्रोतों को   बंद होता देख   उन्हें अपना गांव सूझने लगा   जहां रहने को न भाड़ा लगे,   प्यास बुझाने को न

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  • देश

    महज ज़मीन का टुकड़ा नहीं है देश दीवार पर कीलों से ठुकी कोई तस्वीर भी नहीं जिसे देखकर की जाए सियासी तकरीर देश नहीं हो

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  • हँसी और देस-

    कितनी पीड़ाओं से निथर कर आती है एक अशरीरी हँसी मैं जी भर पीना चाहती हूँ वो हँसी

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  •   यह कैसा समय है

    फूलना - फलना मौसम बदल रहा है ऋतु - चक्र का प्रत्यावर्तन मानसूनी हवाएं पाला बदलकर 

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  • मेरा देश मुझसे बहुत बड़ा है

    देश बहुत बड़ा है रंग और राग से ब्रज के फाग से इश्क के पराग से मजार के चराग से

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  • देश-दिशा से आती खुशबू

    दुनिया भर में कौन सा देश किस दिशा में हैं इससे क्या फरक पड़ता है भला पृथ्वी को

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