कविता

  • ----- हमारा समय एक हादसा है ------

    देवताओं के मुकुट सब गिर गए हैं आधे टूटे पड़े हैं- धूल में नहाए हुए, दुराग्रहों के प्रेत करते नंगा नाच चहुँ ओर कि हमारे

    पूरा पढ़े
  • तथागत

    बांस की छाती पर  सूई से टांके जाते हैं शब्द

    पूरा पढ़े
  • .रंग भी रोते हैं 

    रंग भी रोते हैं  हांँ मैंने रंगों को रोते देखा है ...

    पूरा पढ़े
  • आदमखोर

    नही कोलाहल नही शोर.गुलए रहा टहल गली में शार्दूल। हों गोरूए शुनक या नरए नभचरए नही देख इसे कोई व्याकुल!

    पूरा पढ़े
  • अमलतास !

    अमलतास के गहरे सूर्ख पत्ते अब मुझे नहीं डराते।  हुलस के झूमझूम के कहते हैं लहको ,लहक उठो। बिना तिल-तिल जले

    पूरा पढ़े

पूछताछ करें