कविता

  • पच्छिम दिशा का लंबा इंतजार.. 

    मंझली काकी और सब  कामों के  तरह ही करतीं हैं, नहाने का काम और  बैठ जातीं हैं, शीशे के सामने चीरने अपनी माँग.. 

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  • ब्रेकिंग न्यूज़

    और टीसता अंग अंग भीषण विभीषिका की ओर  इंगित करता रहा अपनी तर्जनी पालतू भेड़िया दुम हिलाता सांत्वना देता रहा

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  • उलझनों का मकड़जाल

    आज सालों बाद गाँव जाना हुआ बाल सखी नलिनी से मुलाकात हुई आई थी वो अपनी माँ की अंतिम क्रिया में जार-जार रोते हुए मेरे

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  • तू चाहता है जो मंज़िल की दीद साँकल खोल

    तू चाहता है जो मंज़िल की दीद साँकल खोल सदायें   देने   लगी  है  उमीद   साँकल खोल

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