कविता

  • भाषा एक हथियार है

    बात ई और उ की मात्रा की नहीं है बात है इस बहाने उन्हें डराने की कभी कभी धमकाने की नीचा दिखाने की हीनताबोध के नदी में ड

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  • आटे का झण्डा   

    पिता का उगाया गेहूँ  धान मक्का बाजरा या कपास  मेरा जीवन नहीं बदल सका

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  • तुम आओगे या मैं जाऊं

    अब तो पतझड़ के बाद की  नंगी शाखाओं पर  नए पत्ते आ चुके हैं और प्रकृति भी अपने 

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  • जनकवि वरवर राव 

    बहुत मुश्किल है कलम की ताकत को नकारना बहुत मुश्किल है विचारों  को दफन करना मुश्किल है कलम को तोड़ना एक तोड़ो हजारों

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  • उपहार

    जिन्हें प्यार करती हूं उन्हें उपहार भेजना चाहती हूं

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