गजल

  • खाता ही खुला है  जिंदगी के बैंक में 

    हर रोज़ जमा करता हूँ सेविंग में तेरे गीत  खाता है तेरा एकल , मेरा कुछ नहीं ! 

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  • हवा  के  साथ  मिलकर  पंछियों  के  पर को ले डूबा ।

    ज़माना  छोड़कर  पीछे  हमें आगे निकलना था  । जुनूँ  आगे निकलने का ज़माने भर को ले डूबा  ।।

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