गजल

  • ख़ूब मुनादी करवा दी है, जश्न मनाओ

    ख़ूब मुनादी करवा दी है, जश्न मनाओ बस्ती में कल फिर शादी है, जश्न मनाओ सबसे नीचे दबी हुई है जनता सारी सबसे ऊपर तो खादी

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  • झूठ के मुर्दा शहर में आत्मा तक सो गई है ,

    झूठ के मुर्दा शहर में आत्मा तक सो गई है , सल्तनत में ‘सच’ की यारो शाश्वत अब तीरगी है ।

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