सुनती हो संगिनी! मौसम की पहली बर्फ गिर गई...कैश ने पर्दा सरकाते हुए लिली की तरफ मुड़कर कहा था। लिली उस समय कॉर्नर के छोटे-से कॉफी टेबल पर नाश्ते के लिए प्लेट्स लगा रही थी। खिड़की खुलते ही उसकी कमर तक खुली पीठ सुबह की ठंडी नीली उजास में चमक उठी थी, साथ ही कमर की निचली सीमा पर बने दो छोटे-से गड्ढों के पास का वह भूरा तील भी! उसने मुड़कर कैश को देखा था-लो! तुम्हारे कविता लिखने का मौसम आ ग....
