अरत बरसों बाद लौटी है, वहां सभी रास्ते बदले-बदले हैं।
वो कुमार हट्टी रेलवे स्टेशन से इस चढ़ाई पर चढ़ रही है कुछ हाफंती-हाफंतीµआर्मी मेस रेजीमेंट (।तउल डमे-त्महपउमदज) दायीं ओर हैं वो और बिल्डिंग्स को पहचानने की कोशिश कर रही हैं। लगता है किसी नई जगह पहुंच गई है। कुछ पहचाना हुआ पर सभी कुछ अब अंजाना लग रहा है जैसे शायद वो पहले कभी यहां आई ही नहीं। भूली बिसरी यादें जैसे लगे कि ....
