शेर सिंह

सैलाब

चार दिन से लगातार मूसलाधार बारिश हो रही थी। धरती-आसमान जैसे एक हो गए थे। तेज रफ्रतार से हो रही बारिश से लोग अब डरे-डरे, सहमे-सहमे से थे। प्रकृति अपने उग्र रूप में दिख रही थी। आसमान में जैसे छेद हो गया था, जहां से बिना रुके बादल बरस रहे थे। जुलाई का महीना था। बेशक बारिश-बरसात का मौसम था। लेकिन एक ही रफ्रतार में चार दिनों से बिना रुके बरसते पानी ने, सबको घर के भीतर ही रहने को मजब....

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