आज कुत्ता आएगा!’
बाथरूम में घुसते ही साहू ने मुझे सूचित किया। रविवार की सुबह के आठ बज रहे थे। यूनिवर्सिटी बॉयज हॉस्टल का बाथरूम अभी भी खाली ही था। सारे निशाचर छात्र दस बजे तक जाएंगे और यहां भीड़ हो जाएगी। मैं इसी भीड़ से बचने के लिए यहां जल्दी आ गया था। साहू भी शायद इसीलिए यहां मुझ से पहले मौजूद था। हम दोनों एम-एससी- फिजिक्स के अंतिम वर्ष में थे, सहपाठी थे और हॉस्टल की ऊपर....
