कब सुख का सूरज निकलेगा?
राजनीति की डाइन आई
भागो भागो भागो भाई
गुर्र गुर्र कुत्ता गुर्राए
अपनी परछाई डरवाए
जंगल जंगल आग लगी है
हर आशंका हुई सगी है
खंडहर खंडहर लटके ताले
डसते हैं काले फन वाले
कालिख पोते हुए उजाले
सच के पैरों में हैं छाले
धुआं धूल कुहरा बहुतेरा
हर चेहरा हो गया लुटेरा
बस्ती बस्ती चीख रही है
उजड़ी उज....
