नंदा पांडेय

नंदा पांडेय की कविताएं

वापसी

वह लौट रही है 
न हारकर,
न जीतकर,
बस अपनी देह से 
सारी परिभाषाएं झाड़ कर 

वह जान गई है 
कीमत और मूल्य
दो अलग शब्द हैं।
जो बिक जाए,
वह सस्ता है,
जो टिक जाए,
वह सच्चा है।

अब उसके हाथों में
थकान नहीं, रचना है 
वह चूल्हे की आंच से
कविता पकाती है,
और शब्दों से
अपनी पहचान बुनती ....

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